राजस्थान विरासत व हकत्याग नामांतरण 2026 — मृत्यु के बाद जमीन अपने नाम कैसे करें

बीकानेर के पास एक परिवार में पिता के निधन के बाद, उनकी 6 बीघा जमीन जमाबंदी में अभी भी उन्हीं के नाम दर्ज थी। तीन बेटों में से एक ने अपना हिस्सा भाइयों के पक्ष में छोड़ने का फैसला किया — इसके लिए विरासत नामांतरण के साथ-साथ हकत्याग नामांतरण भी दर्ज कराना पड़ा। दोनों प्रक्रियाएं Apna Khata पोर्टल से पूरी हुईं, बिना बार-बार तहसील के चक्कर लगाए।

अगर आपके परिवार में भी किसी की मृत्यु के बाद जमीन अभी तक उन्हीं के नाम है, या कोई वारिस अपना हिस्सा छोड़ना चाहता है — यहां पूरी प्रक्रिया है।


💡 Quick Answer: विरासत (Virasat) = मृत्यु के बाद वारिसों के नाम जमीन दर्ज करना हकत्याग (Haqtyag) = कोई वारिस अपना हिस्सा दूसरे वारिस के पक्ष में स्वेच्छा से छोड़े आवेदन कहां: apnakhata.rajasthan.gov.in → नामांतरण के लिये ऑनलाइन आवेदन फीस: विरासत नामांतरण पर कोई स्टाम्प ड्यूटी नहीं — सिर्फ नाममात्र आवेदन शुल्क


विरासत नामांतरण (Virasat) क्या है

जब जमीन के मालिक (खातेदार) की मृत्यु हो जाती है, तो जमीन का रिकॉर्ड अपने आप वारिसों के नाम पर नहीं बदलता — इसके लिए विरासत नामांतरण (Virasat Namantaran) का आवेदन देना पड़ता है।

Apna Khata पोर्टल पर 6 प्रकार के नामांतरण के लिए आवेदन किया जा सकता है — जिनमें विक्रय (Sale), विरासत (Inheritance), दान (Gift), बैंक लोन, और हकत्याग (Haqtyag) शामिल हैं।

महत्वपूर्ण: विरासत नामांतरण के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र अनिवार्य है।


हकत्याग नामांतरण (Haqtyag) क्या है — कब जरूरत पड़ती है

हकत्याग (Haqtyag) का मतलब है — कोई वारिस अपनी विरासत में मिली जमीन का हिस्सा स्वेच्छा से किसी दूसरे वारिस (जैसे भाई-बहन) के पक्ष में छोड़ना

यह कब जरूरत पड़ती है:

  • कई भाई-बहनों में जमीन बराबर बंटी हो, लेकिन कोई एक अपना हिस्सा दूसरे को देना चाहे
  • कोई वारिस विदेश में बसा हो और जमीन में हिस्सेदारी नहीं रखना चाहता हो
  • पारिवारिक सहमति से एक व्यक्ति को पूरी जमीन दी जा रही हो

हकत्याग की खासियत:

  • यह स्वैच्छिक (voluntary) प्रक्रिया है — जबरदस्ती नहीं हो सकती
  • हकत्याग करने वाले वारिस का लिखित सहमति पत्र (Affidavit) जरूरी होता है
  • हकत्याग के बाद, जमाबंदी में सिर्फ उन वारिसों के नाम रहेंगे जिन्होंने हक नहीं छोड़ा

विरासत नामांतरण के लिए जरूरी दस्तावेज़

  • मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)
  • वारिस प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate) — Tehsildar या e-Mitra से जारी
  • मौजूदा जमाबंदी नकल (Apna Khata से डाउनलोड)
  • सभी वारिसों की जानकारी और पहचान (आधार कार्ड)
  • शपथ पत्र (Affidavit) — ट्रांसफर की पुष्टि करते हुए
  • खसरा मैप (Bhu Naksha से, सीमा verify करने के लिए)
  • वसीयत (Will) — अगर उपलब्ध हो (probate/succession certificate सहित)
  • NOC — अगर joint property में कुछ वारिस आवेदन में शामिल नहीं हो रहे

हकत्याग के लिए अतिरिक्त: हक छोड़ने वाले वारिस का लिखित सहमति पत्र/शपथ पत्र


Apna Khata पर Online आवेदन — Step by Step

Step 1: apnakhata.rajasthan.gov.in खोलें

Step 2: “नामांतरण के लिये ऑनलाइन आवेदन” पर क्लिक करें

Step 3: आवेदक की जानकारी भरें — नाम, पिता/पति का नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल, पता

Step 4: नामांतरण का प्रकार चुनें — “विरासत (Inheritance)” या “हकत्याग (Haqtyag)”

Step 5: जिला, गाँव, और property details (खाता नंबर, खसरा नंबर) भरें

Step 6: सभी जरूरी दस्तावेज़ PDF format में अपलोड करें (आमतौर पर प्रति पेज 150KB से कम)

Step 7: फीस का भुगतान करें (₹30 — विरासत के लिए) — ऑनलाइन या नजदीकी e-Mitra कियोस्क से

Step 8: Submit करें → Token/Application Number नोट कर लें

Step 9: आवेदन Patwari के पास verification के लिए जाएगा, फिर Tehsildar अंतिम approval देंगे

Status Check: apnakhata.rajasthan.gov.in → “नामांतरण की स्थिति” → District select करें → Token Number डालें


फीस और समय सीमा

विवरण जानकारी
विरासत नामांतरण पर स्टाम्प ड्यूटी ❌ नहीं लगती
आवेदन शुल्क ₹30 (नाममात्र)
सामान्य मामलों में समय 30-60 दिन
विवादित मामलों में समय 3-6 महीने तक लग सकता है

सबसे बड़ा Rejection Reason — नाम की Spelling

यह सबसे common गलती है जो आवेदन reject करा देती है:

नाम की spelling सभी दस्तावेज़ों में बिल्कुल एक जैसी होनी चाहिए — Aadhaar, मृत्यु प्रमाण पत्र, जमाबंदी, और आवेदन फॉर्म में। थोड़ा सा भी mismatch (जैसे “Ramlal” vs “Ram Lal”) आवेदन reject होने का सबसे बड़ा कारण बनता है।

अगर mismatch है: आवेदन देने से पहले संबंधित दस्तावेज़ में सुधार करा लें, या affidavit के जरिए स्पष्टीकरण संलग्न करें कि दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं।


Common Problems + Fix

समस्या 1: नाम स्पेलिंग mismatch की वजह से आवेदन reject हुआ

Fix: एक affidavit तैयार करें जिसमें स्पष्ट किया जाए कि दोनों नाम variants एक ही व्यक्ति के हैं, सभी documents की photocopy के साथ दोबारा आवेदन करें।

समस्या 2: कुछ वारिस आवेदन में शामिल नहीं हो रहे (विदेश में हैं या असहमत हैं)

Fix: जो उपस्थित नहीं हो सकते, उनकी तरफ से NOC या Power of Attorney के जरिए आवेदन दिया जा सकता है। असहमति की स्थिति में यह विवादित मामला बन सकता है — वकील से सलाह लें।

समस्या 3: वारिस प्रमाण पत्र बनवाने में देरी हो रही है

Fix: Tehsildar कार्यालय या e-Mitra में लिखित आवेदन दें, सभी जरूरी दस्तावेज़ (मृत्यु प्रमाण पत्र, राशन कार्ड) साथ लेकर जाएं।

समस्या 4: हकत्याग के बाद भी जमाबंदी में पुराना record दिख रहा है

Fix: apnakhata.rajasthan.gov.in पर application status दोबारा check करें, और 30 दिन बाद भी अपडेट न हो तो Tehsil कार्यालय से संपर्क करें।


FAQ

राजस्थान में विरासत नामांतरण कैसे करें? apnakhata.rajasthan.gov.in पर “नामांतरण के लिये ऑनलाइन आवेदन” → प्रकार में “विरासत” चुनें → मृत्यु प्रमाण पत्र सहित दस्तावेज़ अपलोड करें → ₹30 फीस भरें → Submit करें।

हकत्याग नामांतरण क्या है? जब कोई वारिस अपनी विरासत में मिली जमीन का हिस्सा स्वेच्छा से किसी अन्य वारिस के पक्ष में छोड़ता है, उसे हकत्याग कहते हैं।

विरासत नामांतरण पर स्टाम्प ड्यूटी लगती है? नहीं — विरासत/इनहेरिटेंस नामांतरण पर स्टाम्प ड्यूटी नहीं लगती, सिर्फ ₹30 का नाममात्र आवेदन शुल्क लगता है।

विरासत नामांतरण में कितना समय लगता है? सामान्यतः 30-60 दिन, विवाद न होने पर। विवादित मामलों में 3-6 महीने तक लग सकते हैं।

नाम की स्पेलिंग अलग-अलग documents में अलग है, क्या करें? एक affidavit के जरिए स्पष्ट करें कि दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं, फिर आवेदन दें — यह सबसे common rejection reason है, इसलिए पहले से ठीक कर लेना बेहतर है।


जरूरी Links

सेवा Link
Apna Khata (नामांतरण) apnakhata.rajasthan.gov.in
Bhu Naksha Rajasthan bhunaksha.rajasthan.gov.in
SSO Rajasthan sso.rajasthan.gov.in
Helpline 0141-2927891

बीकानेर वाले परिवार का विरासत और हकत्याग — दोनों नामांतरण 45 दिन में पूरे हो गए। जमीन अब पूरी तरह से सही वारिस के नाम है।

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यह जानकारी apnakhata.rajasthan.gov.in और राजस्थान राजस्व मंडल की सार्वजनिक प्रक्रिया पर आधारित है। यह कानूनी सलाह नहीं है — विशेष मामलों के लिए वकील या तहसील कार्यालय से सलाह लें।

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