फौती नामांतरण MP 2026 — मृत्यु के बाद जमीन अपने नाम कैसे करवाएं | RCMS ऑनलाइन गाइड

जबलपुर के पास एक गाँव में रामलाल जी के निधन के बाद, उनकी 5 एकड़ जमीन खतौनी में अभी भी उन्हीं के नाम दर्ज थी। बेटे सुरेश को PM-Kisan की किस्त रुक गई, क्योंकि record में मृतक का नाम था। पटवारी के पास गए तो पता चला — फौती नामांतरण कराना जरूरी है, यानी मृतक के नाम से वारिसों के नाम जमीन transfer करानी होगी।

अगर आपके परिवार में भी किसी की मृत्यु के बाद जमीन अभी तक उन्हीं के नाम है — यहां पूरी प्रक्रिया है।


💡 त्वरित उत्तर: फौती नामांतरण = मृत्यु के बाद जमीन वारिसों के नाम transfer करने की प्रक्रिया आवेदन कहाँ: rcms.mponline.gov.in (पुराना rcms.mp.gov.in अब सेवाएं बंद कर चुका है) जरूरी दस्तावेज़: मृत्यु प्रमाण पत्र, वारिस प्रमाण पत्र, खतौनी की नकल, आधार कार्ड समय सीमा: सामान्यतः 30-45 दिन, विवाद न होने पर


फौती नामांतरण क्या होता है

जब किसी जमीन के मालिक की मृत्यु हो जाती है, तो उस जमीन का record अपने आप वारिसों के नाम पर नहीं बदलता — इसके लिए एक अलग आवेदन देना पड़ता है, जिसे फौती नामांतरण कहते हैं।

“फौती” शब्द का मतलब मृत्यु से जुड़ा नामांतरण होता है — यानी सामान्य खरीद-बिक्री वाले नामांतरण से अलग एक विशेष प्रक्रिया, जिसमें वारिसों का निर्धारण और उनका हक तय करना शामिल होता है।


वसीयत के साथ बनाम बिना वसीयत — दो अलग प्रोसेस

यह सबसे महत्वपूर्ण अंतर है — प्रक्रिया इसी पर निर्भर करती है:

वसीयत के साथ (With Will) बिना वसीयत (Without Will)
आधार मृतक की लिखित वसीयत कानूनी उत्तराधिकार नियम (हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम आदि)
दस्तावेज़ Registered वसीयत की प्रति वारिस प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate)
वारिसों की सहमति वसीयत में जो लिखा है वही मान्य सभी कानूनी वारिसों की जानकारी जरूरी
विवाद की संभावना कम (यदि वसीयत स्पष्ट हो) अधिक (कई वारिस होने पर)

वसीयत नहीं है तो: सभी कानूनी वारिसों (पत्नी/पति, बच्चे, आदि) के नाम बराबर हिस्सों में या स्थानीय उत्तराधिकार कानून के अनुसार दर्ज होंगे — जब तक वारिसों के बीच आपसी सहमति से हक त्याग (एक वारिस दूसरे के पक्ष में अपना हिस्सा छोड़े) न हो।


फौती नामांतरण के लिए जरूरी दस्तावेज़

  • मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) — नगर निगम/ग्राम पंचायत से जारी
  • वारिस प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate) — तहसील से जारी होता है
  • खतौनी/खसरे की मौजूदा नकल
  • सभी वारिसों के आधार कार्ड
  • वसीयत की प्रति (यदि उपलब्ध हो, registered)
  • हक त्याग पत्र (यदि कोई वारिस अपना हिस्सा छोड़ रहा हो)
  • पासपोर्ट साइज फोटो (वारिसों की)

RCMS पर ऑनलाइन आवेदन — Step by Step

Step 1: rcms.mponline.gov.in खोलें

Step 2: Login करें या नया registration करें (mobile OTP से)

Step 3: “नामांतरण आवेदन” सेक्शन चुनें

Step 4: नामांतरण का प्रकार चुनें — “फौती नामांतरण”

Step 5: जिला, तहसील, गाँव, और खसरा/खाता नंबर भरें

Step 6: मृतक और वारिसों की जानकारी भरें

Step 7: सभी आवश्यक दस्तावेज़ स्कैन करके अपलोड करें

Step 8: आवेदन Submit करें → आवेदन संख्या (Application Number) नोट कर लें

Step 9: आवेदन पटवारी के पास verification के लिए जाएगा, फिर तहसीलदार अंतिम आदेश देंगे

⚠️ ध्यान दें: पुराना पोर्टल rcms.mp.gov.in अब सेवाएं बंद कर चुका है। वर्तमान में आवेदन rcms.mponline.gov.in से ही करें — यही active पोर्टल है।


फौती नामांतरण की समय सीमा और स्टेटस चेक

समय सीमा:

स्थिति अनुमानित समय
कोई विवाद नहीं, दस्तावेज़ पूरे 30-45 दिन
कोई आपत्ति/विवाद आए कई महीने तक लग सकते हैं

स्टेटस चेक कैसे करें:

rcms.mponline.gov.in → Login → “आवेदन स्थिति” → Application Number डालें → Status देखें

पूरी खतौनी और खसरा नकल निकालने का तरीका हमारी MP Bhulekh गाइड में विस्तार से बताया गया है।


आपत्ति (Objection) आने पर क्या होता है

फौती नामांतरण की सूचना सार्वजनिक इश्तेहार (सूचना पटल/नोटिस बोर्ड) पर प्रकाशित की जाती है, ताकि कोई भी पक्ष आपत्ति दर्ज करा सके — आमतौर पर 15 दिनों के भीतर।

यदि कोई आपत्ति आती है:

  • मामला “विवादित नामांतरण” के रूप में दर्ज होता है
  • तहसीलदार दोनों पक्षों की सुनवाई करते हैं
  • सुनवाई के बाद आदेश पारित होता है
  • असंतुष्ट पक्ष SDO कोर्ट में अपील कर सकता है

Common Problems + Fix

समस्या 1: rcms.mp.gov.in पर पुराना आवेदन दिख नहीं रहा

Fix: पोर्टल माइग्रेट हो चुका है। rcms.mponline.gov.in पर लॉगिन करके अपना पुराना आवेदन खोजें, या नजदीकी तहसील कार्यालय से status की पुष्टि करें।

समस्या 2: वारिसों में आपसी सहमति नहीं बन रही

Fix: पारिवारिक मध्यस्थता की कोशिश करें। अगर विवाद सुलझ नहीं रहा, तो मामला तहसीलदार/Revenue Court के सामने formal रूप से रखना होगा।

समस्या 3: वारिस प्रमाण पत्र बनवाने में देरी हो रही है

Fix: तहसील कार्यालय में लिखित आवेदन दें और सभी जरूरी दस्तावेज़ (मृत्यु प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, परिवार पहचान) साथ लेकर जाएं — अधूरे दस्तावेज़ सबसे बड़ी वजह होते हैं देरी की।

समस्या 4: नामांतरण के बाद भी PM-Kisan में पुराना नाम दिख रहा है

Fix: नामांतरण पूरा होने के बाद अपना खसरा आधार से दोबारा लिंक कराएं — पुराना record अपने आप sync नहीं होता, अलग से update करना पड़ता है।


FAQ

फौती नामांतरण क्या होता है? मृत्यु के बाद मृतक के नाम से वारिसों के नाम जमीन का record transfer करने की प्रक्रिया।

फौती नामांतरण के लिए कहाँ आवेदन करें? rcms.mponline.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करें — पुराना rcms.mp.gov.in अब सेवाएं बंद कर चुका है।

फौती नामांतरण में कितना समय लगता है? सामान्यतः 30-45 दिन, यदि कोई विवाद न हो।

वसीयत न हो तो जमीन किसके नाम होगी? सभी कानूनी वारिसों के नाम, स्थानीय उत्तराधिकार कानून के अनुसार — जब तक वारिस आपस में हक त्याग न करें।

फौती नामांतरण के लिए कौन से दस्तावेज़ चाहिए? मृत्यु प्रमाण पत्र, वारिस प्रमाण पत्र, खतौनी की नकल, आधार कार्ड, और यदि हो तो वसीयत की प्रति।

नामांतरण पर आपत्ति आ जाए तो क्या होगा? मामला विवादित नामांतरण के रूप में दर्ज होगा, तहसीलदार सुनवाई करेंगे, और असंतुष्ट पक्ष SDO कोर्ट में अपील कर सकता है।


जरूरी Links

सेवा Link
RCMS (नामांतरण आवेदन) rcms.mponline.gov.in
MP Bhulekh (WebGIS 2.0) webgis2.mpbhulekh.gov.in
Helpline 0755-6720200 (MPOnline)

सुरेश जी का फौती नामांतरण 40 दिन में पूरा हो गया। जमीन अब उनके नाम है, और PM-Kisan की किस्त भी दोबारा शुरू हो गई।

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