एक बार मैं अपने गाँव में एक बुजुर्ग के साथ बैठा था।
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वो अपने बेटे से फोन पर बात कर रहे थे जो शहर में काम करता है। बेटे ने कहा था — “बाबा, bank में खसरा नंबर बताना है। खतौनी में देख लो।”
बुजुर्ग ने फोन रखा और मुझसे पूछा — “बेटा, खसरा नंबर और खतौनी — यह दोनों एक ही चीज है क्या? या अलग-अलग?”
मैंने कहा — “नहीं चाचा, दोनों अलग हैं। पर एक में दूसरा होता है।”
वो थोड़ा confuse हुए।
मैंने एक example दिया — और उनकी आँखों में समझ की चमक आई।
वही example मैं आपको भी दूँगा। पर पहले —
एक लाइन में जवाब — Featured Snippet
Khasra एक जमीन के plot का unique नंबर होता है। Khatauni एक document है जिसमें किसी मालिक की सभी जमीनों की जानकारी होती है — और उसमें खसरा नंबर लिखे होते हैं। खसरा = plot ID, खतौनी = मालिक का record।
वो Example जो सब कुछ Clear कर देगा
सोचो तुम्हारे मोहल्ले में 50 घर हैं।
हर घर का एक door number है — जैसे 1, 2, 3… 50। यह door number उस घर की पहचान है। चाहे मालिक बदले — door number वही रहेगा।
अब सोचो — मोहल्ले के एक आदमी के पास 3 घर हैं — नंबर 7, 23, और 41।
तो उसका “record” यह है:
- मालिक: रामप्रसाद
- घर नंबर 7 — 1200 sqft
- घर नंबर 23 — 900 sqft
- घर नंबर 41 — 1500 sqft
Door number = खसरा नंबर रामप्रसाद का पूरा record = खतौनी
इतना simple है।
खसरा नंबर — पूरी तरह समझो
खसरा नंबर हर जमीन के plot का unique identification number है।
जैसे आपके Aadhaar का नंबर — वैसे ही जमीन का खसरा नंबर। एक बार assign हुआ तो हमेशा के लिए। मालिक बदले, जमीन बिके — खसरा नंबर नहीं बदलता।
UP में इसे गाटा संख्या भी कहते हैं — दोनों एक ही चीज हैं।
खसरा नंबर से क्या पता चलता है?
- वो specific plot कहाँ है
- उसका area कितना है
- उसका प्रकार क्या है (सिंचित/असिंचित/आबादी)
- इस वक्त किसके नाम पर है
खसरा नंबर कहाँ मिलता है?
- पुरानी खतौनी में
- रजिस्ट्री के कागजों में
- upbhulekh.gov.in पर नाम से search करने पर
- upbhunaksha.gov.in पर नक्शे में हर plot पर
खतौनी — पूरी तरह समझो
खतौनी एक सरकारी document है।
इसमें एक व्यक्ति या family के नाम पर जितनी भी जमीनें हैं — सबकी जानकारी एक जगह होती है।
खतौनी में यह होता है:
- खातेदार का नाम (मालिक)
- पिता / पति का नाम
- हर जमीन का खसरा / गाटा नंबर
- हर जमीन का रकबा (area)
- जमीन का प्रकार
- कोई loan या बोझ है तो उसकी जानकारी
एक खतौनी में कई खसरा नंबर हो सकते हैं।
अगर किसी के पास 5 अलग-अलग खेत हैं — उसकी एक खतौनी में सभी 5 खसरा नंबर listed होंगे।
दोनों में फर्क — एक Table में
| बात | खसरा नंबर | खतौनी |
|---|---|---|
| क्या है | Plot का ID नंबर | मालिक का document |
| किसके लिए | एक specific जमीन | एक मालिक की सभी जमीनें |
| बदलता है | लगभग कभी नहीं | मालिक बदलने पर बदलती है |
| कहाँ मिलता/मिलती है | खतौनी में, नक्शे में | upbhulekh.gov.in पर |
| एक में कितने | एक | कई खसरा नंबर हो सकते हैं |
| Bank को क्या चाहिए | खसरा नंबर (खतौनी से) | खतौनी नकल (Real-Time) |
खाता संख्या — तीसरी चीज जो और confuse करती है
बहुत लोगों को खसरा और खतौनी के साथ-साथ खाता संख्या भी confuse करती है।
तो तीनों एक साथ समझो:
खसरा नंबर = एक plot का ID खाता संख्या = एक मालिक के सभी plots का group ID खतौनी = खाता संख्या से जुड़ा पूरा document
Example:
- रामप्रसाद के 3 खेत हैं — खसरा 45, 67, 89
- तीनों का एक खाता है — खाता संख्या 12
- खाता 12 का document = रामप्रसाद की खतौनी
जब कोई पूछे “खाता नंबर बताओ” — उनका मतलब है वो number जिसके अंदर आपके सभी खसरे हैं।
upbhulekh.gov.in पर इन तीनों से कैसे Search करें
UP Bhulekh portal पर तीनों से search हो सकती है। यहाँ देखो कौन सा option कब use करें:
खसरा नंबर से search
“खसरा/गाटा संख्या द्वारा” — यह option तब use करो जब:
- कोई specific plot की जानकारी चाहिए
- जमीन खरीदने से पहले verify करना हो
- नक्शे से खसरा नंबर मिला हो
खाता संख्या से search
“खाता संख्या द्वारा” — यह option तब use करो जब:
- मालिक की सभी जमीनें एक साथ देखनी हों
- पुरानी खतौनी में खाता नंबर लिखा हो
नाम से search
“खातेदार के नाम द्वारा” — यह option तब use करो जब:
- खसरा या खाता नंबर याद नहीं
- किसी और की जमीन verify करनी हो
सभी के लिए portal एक ही है: 👉 upbhulekh.gov.in
Real Life में यह कब काम आता है
Bank Loan लेना है: Bank खसरा नंबर और खतौनी नकल दोनों माँगता है। खतौनी में खसरा नंबर लिखा होता है — तो खतौनी नकल ले जाओ।
जमीन बेचनी है: Buyer को खसरा नंबर बताओ ताकि वो upbhulekh.gov.in पर verify कर सके। और खतौनी नकल भी दो।
PM Kisan में problem है: PM Kisan में खसरा नंबर link होता है। अगर problem आ रही है — खतौनी से सही खसरा नंबर check करो।
जमीन का बँटवारा होना है: हर भाई को अलग-अलग खसरे मिलेंगे। नए खाते बनेंगे। नई खतौनियाँ बनेंगी।
Court case है: Court में खसरा नंबर specific plot identify करता है। खतौनी ownership prove करती है।
एक बात जो ज्यादातर लोग नहीं जानते
खसरा नंबर कभी-कभी बदलता भी है।
कब? जब:
- बड़ी जमीन के टुकड़े होते हैं — नए खसरे बनते हैं (जैसे 45/1, 45/2)
- Re-survey होती है
- सरकार किसी कारण से re-numbering करे
अगर आपका पुराना खसरा नंबर portal पर नहीं मिल रहा — तो हो सकता है उसका नया नंबर बन गया हो। पटवारी से confirm करो।
जरूरी Links — एक जगह सब
| काम | Official Link |
|---|---|
| खतौनी में खसरा देखें | upbhulekh.gov.in |
| नक्शे में खसरा ढूंढें | upbhunaksha.gov.in |
| Mutation / नामांतरण | vaad.up.nic.in |
| UP Bhulekh Helpline | 0522-2217145 |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या एक खसरा नंबर पर दो मालिक हो सकते हैं? हाँ — अगर जमीन jointly owned है। जैसे दो भाइयों की साझा जमीन। दोनों के नाम एक ही खसरे में होंगे। बाद में बँटवारे पर अलग-अलग खसरे बनेंगे।
खतौनी में खसरा नंबर गलत लिखा है — क्या करें? तहसील में correction application देनी होगी। पटवारी से मिलो — वो lekhpal के through correction process करवाएगा।
क्या खसरा नंबर हर राज्य में same system होता है? नहीं — हर राज्य में अलग नाम और system है। UP में खसरा/गाटा, Maharashtra में Survey Number, Punjab में Khasra/Murrabba। System similar है पर नाम अलग।
खतौनी और रजिस्ट्री में क्या फर्क है? रजिस्ट्री Sub-Registrar के यहाँ होती है — यह sale का record है। खतौनी Revenue Department का record है — यह ownership का record है। दोनों जरूरी हैं।
क्या बिना खसरा नंबर के खतौनी मिल सकती है? हाँ — नाम से या खाता नंबर से भी खतौनी निकाल सकते हो upbhulekh.gov.in पर। खसरा नंबर जरूरी नहीं।
आखिरी बात
उन बुजुर्ग को जब घर के door number वाला example दिया — वो तुरंत समझ गए।
“अच्छा! तो खसरा नंबर घर का नंबर है — और खतौनी उस आदमी की list है जिसके पास कितने घर हैं।”
बिल्कुल सही।
यह दो चीजें समझ लो — UP Bhulekh portal पर कुछ भी confuse नहीं करेगा।
अगर यह article helpful लगा — उन किसान भाइयों के साथ share करो जो इन terms से confuse रहते हैं। एक share से बड़ी मदद होती है।
Comment में बताओ अगर कोई और term है जो confuse करती हो — अगले article में cover करेंगे।
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यह जानकारी UP Government के official portal upbhulekh.gov.in पर आधारित है। Revenue terms और process राज्य सरकार के नियमों के अनुसार बदल सकते हैं। Legal कामों के लिए तहसील से certified documents लें।


