शिकमी रैयत और बासोबास पट्टा बिहार 2026 — अधिकार और आवेदन प्रक्रिया

सीतामढ़ी के एक परिवार की तीन पीढ़ियां एक जमीन पर बटाई (sharecropping) पर खेती करती आ रही थीं — रिकॉर्ड में इसे “शिकमी” दर्ज किया गया था। परिवार को नहीं पता था कि भूमि सुधार कानून के बाद उन्हें इस जमीन पर स्थायी अधिकार मिल सकता है। सर्वे के दौरान सही आवेदन देने के बाद, उनका नाम स्थायी कब्जेदार के रूप में दर्ज हो गया।

अगर आप भी बिहार में शिकमी भूमि या बासोबास पट्टा को लेकर जानकारी चाहते हैं — यहां पूरी जानकारी है।


💡 Quick Answer: शिकमी रैयत = वह व्यक्ति जो किसी मूल रैयत (मालिक) की जमीन पर बटाई/उप-किरायेदारी (sub-tenancy) पर खेती करता है भूमि सुधार कानून के बाद: कई शिकमीदारों को स्थायी अधिकार (permanent rights) मिले बासोबास पट्टा/परचा = भूमिहीन परिवारों को रहने के लिए दिया गया सरकारी दस्तावेज़ आवेदन कहां: DLRS Bihar फॉर्म व स्थानीय सर्वे कैंप/Anchal कार्यालय


शिकमी रैयत (Shikmi Raiyat) क्या है

शिकमी (Sikmi/Shikmi) का मतलब है उप-किरायेदारी (sub-tenancy) — जब कोई मूल रैयत (Raiyat) अपनी जमीन का हिस्सा किसी दूसरे किसान को खेती के लिए लीज पर देता है, तो उस दूसरे किसान को शिकमीदार (Sikmidar) कहा जाता है।

Sikmi Khatiyan इन उप-किरायेदारी अधिकारों को रिकॉर्ड करता है — यह मूल रैयत के अधिकार से अलग एक विशेष श्रेणी है।


शिकमीदार को मालिकाना हक कब मिलता है

Bihar Land Reforms Act के बाद, बड़ी संख्या में शिकमीदारों को स्थायी अधिकार (permanent rights) दिए गए — उन प्लॉट्स पर जिन पर वे लंबे समय से खेती कर रहे थे।

इसका मतलब:

  • अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य दशकों से किसी जमीन पर शिकमीदार के रूप में खेती कर रहा है, तो कानून के तहत स्थायी अधिकार का दावा किया जा सकता है
  • यह दावा साक्ष्य आधारित होता है — पुराने लगान रसीद, khatiyan में शिकमी entry, और निरंतर कब्जे के प्रमाण जरूरी होते हैं

महत्वपूर्ण: शिकमी अधिकार का दावा जटिल हो सकता है, खासकर अगर मूल रैयत या उनके वारिस विवाद करें। ऐसे मामलों में Anchal कार्यालय से मार्गदर्शन लें और जरूरत पड़ने पर वकील से सलाह लें।


बासोबास पट्टा (Basobas Patta) क्या है

बिहार सरकार ने भूमिहीन गरीब परिवारों को रहने के लिए जमीन का छोटा टुकड़ा (homestead land) आवंटित करने के लिए बासोबास पट्टा (जिसे “पर्चा” या “परचा” भी कहा जाता है) की व्यवस्था बनाई है।

बिहार में तीन प्रमुख प्रकार की Homestead भूमि होती है, जिन पर गरीब परिवार अक्सर बसे होते हैं:

  1. रैयती (Raiyati) भूमि पर
  2. गैर मजरूआ खास/मालिक (Gairmazarua Khas/Malik) भूमि पर
  3. गैर मजरूआ आम (Gairmazarua Aam) भूमि पर

इन श्रेणियों के बारे में विस्तृत जानकारी हमारी गैर मजरूआ व खास महल गाइड में दी गई है।


बासोबास पर्चा (Basgit Parcha) कैसे बनवाएं

जो परिवार इन तीन श्रेणियों में से किसी भी भूमि पर बसे हैं लेकिन उनके पास बासगीत पर्चा नहीं है, वे इसके लिए आवेदन कर सकते हैं:

Step 1: अपने Anchal (Circle) कार्यालय में संपर्क करें

Step 2: आवेदन के साथ यह साबित करने वाले दस्तावेज़/सबूत दें:

  • कब्जे की अवधि (कितने समय से रह रहे हैं)
  • स्थानीय गवाह या सामुदायिक प्रमाण
  • मौजूदा घर/निर्माण का प्रमाण

Step 3: Bihar Privileged Persons’ Homestead Tenancy Act, 1947 के प्रावधानों के तहत आवेदन की जांच होगी

Step 4: पात्र पाए जाने पर बासोबास पट्टा/परचा जारी होता है

ऐसे मामलों में पात्रता की शर्तें और प्रक्रिया समय-समय पर बदल सकती हैं — नवीनतम जानकारी के लिए सीधे अपने Anchal कार्यालय या Circle Officer से संपर्क करें।


सर्वे में इन जमीनों को अपने नाम कैसे दर्ज कराएं

वर्तमान बिहार Special Survey (2026) के दौरान:

Step 1: dlrs.bihar.gov.in से फॉर्म 2 (स्व-घोषणा) डाउनलोड करें

Step 2: शिकमी अधिकार या बासोबास पट्टे से जुड़े दस्तावेज़ (पुराना पर्चा, लगान रसीद, khatiyan entry) साथ रखें

Step 3: फॉर्म 2 भरकर, सहायक दस्तावेज़ों सहित सर्वे कैंप में अमीन के पास जमा करें

Step 4: यदि वंशावली संबंधी दावा भी है (जैसे विरासत में मिली शिकमी भूमि), फॉर्म 3(1) भी साथ जमा करें

फॉर्म 2/3 भरने की पूरी प्रक्रिया हमारी वंशावली व फॉर्म 2/3 गाइड में विस्तार से बताई गई है।


Common Problems + Fix

समस्या 1: शिकमी अधिकार साबित करने के लिए पुराने रसीद नहीं हैं

Fix: स्थानीय गवाहों, khatiyan में मौजूदा entry, और निरंतर कब्जे के अन्य प्रमाण (जैसे बिजली/पानी कनेक्शन के पुराने दस्तावेज़) इकट्ठा करें। Anchal कार्यालय से मार्गदर्शन लें।

समस्या 2: मूल रैयत/उनके वारिस शिकमी दावे का विरोध कर रहे हैं

Fix: यह एक विवादित मामला बन सकता है — Revenue Court या जरूरत पड़ने पर Civil Court में मामला ले जाना पड़ सकता है। वकील से सलाह लें।

समस्या 3: बासोबास पर्चा के लिए आवेदन दिया, कोई जवाब नहीं आ रहा

Fix: कुछ हफ्तों बाद Anchal कार्यालय में लिखित रिमाइंडर दें। जरूरत पड़ने पर Circle Officer से सीधे मिलें।

समस्या 4: सर्वे के दौरान शिकमी/बासोबास भूमि का सही record नहीं बन रहा

Fix: फॉर्म 2 के साथ सभी सहायक दस्तावेज़ स्पष्ट रूप से संलग्न करें, और सर्वे कैंप में अमीन से मिलकर स्थिति स्पष्ट करें — देरी होने पर संपर्क बनाए रखें।


FAQ

शिकमी रैयत किसे कहते हैं? वह व्यक्ति जो किसी मूल रैयत की जमीन पर उप-किरायेदारी (sub-tenancy) के तहत खेती करता है, उसे शिकमीदार कहा जाता है।

क्या शिकमीदार को जमीन का मालिकाना हक मिल सकता है? हां — भूमि सुधार कानून के बाद कई शिकमीदारों को उनके द्वारा लंबे समय से जोती जा रही भूमि पर स्थायी अधिकार दिए गए हैं, यह दावा साक्ष्य पर निर्भर करता है।

बासोबास पट्टा क्या है? भूमिहीन गरीब परिवारों को रहने के लिए दी गई सरकारी homestead भूमि का दस्तावेज़ (जिसे परचा भी कहते हैं)।

बासोबास पर्चा के लिए कहां आवेदन करें? अपने Anchal (Circle) कार्यालय में, कब्जे और निवास का प्रमाण देकर।

सर्वे में शिकमी/बासोबास भूमि कैसे दर्ज कराएं? dlrs.bihar.gov.in से फॉर्म 2 (और जरूरत पड़ने पर फॉर्म 3) डाउनलोड करके, सहायक दस्तावेज़ों सहित सर्वे कैंप में जमा करें।


जरूरी Links

सेवा Link
DLRS Bihar (फॉर्म डाउनलोड) dlrs.bihar.gov.in
Bihar Bhumi (Khatiyan) biharbhumi.bihar.gov.in

सीतामढ़ी वाले परिवार का नाम अब स्थायी कब्जेदार के रूप में दर्ज हो चुका है — पीढ़ियों की मेहनत आखिरकार कानूनी मान्यता में बदल गई।

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यह जानकारी Bihar Land Reforms Act, Bihar Privileged Persons’ Homestead Tenancy Act 1947, और dlrs.bihar.gov.in की सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है। यह कानूनी सलाह नहीं है — विशेष मामलों के लिए वकील या Anchal कार्यालय से सलाह जरूर लें।

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